Saturday, October 30, 2010

Ghagh Aur Bhaddari Ki Kahawatein(घाघ और भड्डरी की कहावतें )(31 to 35)

३१. अहीर की मित्रता और बादल की छाया का भरोसा नहीं करना चाहिए |
३२. चने की खेती, कसाई की जीविका और कन्याओं की बढ़ती, अगर इनसे भी धन न घटे तो अपने से जबरदस्त से झगढ़ा कर लेना चाहिए |
३३. जो आदमी ताल में नहाता और ओस में सोता है, उसे देव नहीं मारते वो खुद ही मर जाता है |
३४. जिस आदमी की छाती पर एक भी बाल न हो उससे सबको सावधान रहना चाहिए |
३५. माँ का गुण पुत्र में आता है और पिता का गुण घोढे में आता है, यदि बहुत न हुआ तो थोढ़ा तो होता ही है |

Friday, October 29, 2010

Ghagh Aur Bhaddari Ki Kahawatein(घाघ और भड्डरी की कहावतें )(26 to 30)

२६. आठ गाँव का चौधरी हो या बारह गाँव का राव, पर जो अपने काम न आये वो ऐसी तैसी में जाये |
२७. आम, नीबू और बनिया गला दबाने से ही रस देते हैं और कायस्थ, कौवा मुर्दे से भी रस लेते हैं |
२८. चोर, जुआरी, गंठ्कता और छिनाल स्त्री अगर सौ सौगंध भी खाए तो इनका विश्वास न करना चाहिए |
२९. छज्जे की बैठक बुरी होती है, परछाई की छाया बुरी होती है, इसी प्रकार निकट का चाहने वाला बुरा होता है जो नित्य उठकर बांह पकढ़ता है |
३०. जो घर में बैठे बैठे बातें बनाता है, उसकी देह पर न वस्त्र होता है न पेट में भात अर्थात वो गरीब हो जाता है |

Thursday, October 28, 2010

Ghagh Aur Bhaddari Ki Kahawatein(घाघ और भड्डरी की कहावतें )(21 to 25)

२१. जो सबसे पहले खेत बोता और सबसे पहले मारता है, वो कभी नहीं हारता है |
२२. प्रेम को हंसी नष्ट कर देती है और जो बासी रोटी खाते हैं उनकी बुध्धि नष्ट हो जाती है |
२३. जो नीच आदमियों से लेनदेन करता है, जो दी हुई चीज़ का दम हंस कर मांगता है और जिसे आलस्य घेरे रहता है, ये तीनो निकम्मे हैं |
२४. रिश्वतखोर हाकिम, कपटी मित्र और चोर पुत्र को गहरे पानी में डुबो देना चाहिए |
२५. नीच प्रक्रति का मंत्री राजा का, काई तालाब का, फूट मान मर्यादा का और बिवाई पैर का नाश करती है |

Wednesday, October 27, 2010

Ghagh Aur Bhaddari Ki Kahawatein(घाघ और भड्डरी की कहावतें )(16 to 20)

१६. बरसात का न होना, स्त्री का पिता के घर होना, पुत्र का परदेश में होना और पति का बिस्तर पर बीमार पढ़े रहना, ये दुःख की सीमायें हैं |
१७. ढीली ढाली खाट, वात रोग से व्यथित देह, कुलटा स्त्री, बाज़ार में घर और भाई का बिगढ़ कर दुश्मन से मिल जाना, ये विप्पति की हद हैं |
१८. पुत्र अपनी डाट-डपट नहीं मानता, भाई नित्य झगढ़ा करता है और बटवारा चाहता है, स्त्री झागढ़ालू और कर्कशा है, पास पढोस सब दुष्ट बसे हुए हैं, मालिक न्याय अन्याय का विचार नहीं करता ये अपार विप्पतियाँ हैं |
१९. जहाँ नौकर चोर और राजा निर्दयी हो वहां धैर्य रखना बेकार है |
२०. दूसरों के भरोसे पर व्यापार करने वाला, संदेशे के द्वारा खेती करने वाला, बिना वर देखे बेटी का ब्याह करने वाला तथा जो दूसरों के द्वार पर धरोहर गाढ़ता है, ये चारों छाती पीट कर रोते हैं |

Tuesday, October 26, 2010

Ghagh Aur Bhaddari Ki Kahawatein(घाघ और भड्डरी की कहावतें )(11 to 15)

११. जो दूसरे के घर में रहता है, स्त्री के कहे पर चलता है और दूसरे गाँव में ईख बोता है, ये तीनो ही नष्ट हो जाते हैं |
१२. चैत्र में गुढ़, बैसाख में तेल, जेठ में राह, आषाढ़ में बैल, सावन में साग, भादों में दही, कुवार में करेला, कातिक में मठ्ठा, अघहन में जीरा, पौष में धनिया, माघ में मिश्री, और फाल्गुन में चना हानिकारक है |
१३. कुवार में गुढ़, कातिक में मुली, अघहन में तेल, पौष में दूध, माघ में घी वाली खिचढ़ी, फाल्गुन में सुबह उठ कर नहाना, और चैत्र में नीम लाभकारी होता होता है |
१४. चटकीली मटकीली स्त्री और चौंकने वाला बैल दोनों गृहस्थ के दुश्मन हैं |
१५. जिसकी पुत्र वधु ढीठ हो, कन्या घमंडी हो, पति निर्दयी हो, और घर में खाने के लिए अन्न न हो, वो स्त्री अभागिन है |

Monday, October 25, 2010

Ghagh Aur Bhaddari Ki Kahawatein(घाघ और भड्डरी की कहावतें )(6 to 10)

६. आलस्य और नींद किसान का, खांसी चोर का, कीचढ़ वाली आंखें वैश्या का और दासी साधू का नाश करती है |
७. ढोल, गंवार और अंगारा तीनो फूटने से नष्ट हो जाते हैं; मगर ककढ़ी, कपास और अनार फूटने से बन जाते हैं मतलब मूल्यवान हो जाते हैं |
८. भूरे रंग की हथिनी, गंजे सिर वाली स्त्री और पौष माह की वर्षा बहुत शुभ है, ये किसी किसी को नसीब होते हैं |
९. बगुले के बैठने से पेढ़ का नाश हो जाता है,
गोभी के जमने से खेत नष्ट हो जाता है;
मुढिया (वह साधू जो सिर मुढ़ाये रहता है ) जिस घर में आता जाता है वह घर नष्ट हो जाता है ,
राजा लोभी हो तो उसका राज नष्ट हो जाता है |
१०. खेती करना, चिठ्ठी लिखना, विनती करना और घोढे की तांग कसना , अपने ही हाथ से करना चाहिए | अगर लाख आदमी भी साथ हो तब भी स्वयं करना चाहिए |

Ghagh Aur Bhaddari Ki Kahawatein(घाघ और भड्डरी की कहावतें )(1 to 5)

१. चुप पंडित और मैली वैश्या अपना घर नष्ट करते हैं |
२. व्यक्ति की लम्बाई से छोटी खटिया उस पर बहुत बढ़ी विप्पति है |
३. नस काटने वाली जूती, बात काटने वाली स्त्री, पहली संतान कन्या, और बाबला भाई --- ये चार बढे दुःख हैं |
४. जो सिर पर बोझा लिए हुए भी गाता है, वो मुर्ख है |
५. जो उधार लेकर क़र्ज़ देता है, जो छप्प्पर के घर में ताला लगाता है और जो साले के साथ बहन को भेजता है, इन तीनो का मुह काला होता है |